भारत की प्रमुख नदियाँ: उद्गम, प्रवाह दिशा, नदी घाटियाँ

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भारत की प्रमुख नदियाँ: उद्गम, प्रवाह दिशा, नदी घाटियाँ और पर्यावरणीय चुनौतियाँ (Complete Geography Guide)

भारत की नदियाँ सिर्फ पानी की धाराएँ नहीं हैं, बल्कि हमारी सभ्यता, कृषि, अर्थव्यवस्था और राजनीति की रीढ़ हैं। UPSC, BPSC, SSC, CAT जैसी परीक्षाओं में बार-बार पूछे जाने वाले सवाल हों या आज की नदी प्रदूषण और जल विवाद की समस्याएँ — भारतीय नदियों को समझना आज पहले से कहीं ज्यादा ज़रूरी हो गया है।

Quick Summary:
इस ब्लॉग में आप जानेंगे भारत की प्रमुख नदियों का उद्गम स्थल, प्रवाह दिशा, नदी घाटियाँ, पश्चिम व पूर्व की ओर बहने वाली नदियाँ, शहरीकरण का प्रभाव, प्रदूषण की समस्या और अंतर्राज्यीय जल विवाद — एक ही जगह, आसान भाषा में।

1️⃣ भारत की नदियाँ: भौगोलिक आधार और वर्गीकरण

भारत की नदियों को मुख्य रूप से तीन भागों में बाँटा जाता है — हिमालयी नदियाँ, प्रायद्वीपीय नदियाँ और मरुस्थलीय नदियाँ। इन नदियों का उद्गम, प्रवाह दिशा और जल वहन क्षमता अलग-अलग होती है।

हिमालयी नदियाँ जैसे गंगा, यमुना और ब्रह्मपुत्र बारहमासी होती हैं क्योंकि इन्हें बर्फ और वर्षा दोनों से जल मिलता है। वहीं प्रायद्वीपीय नदियाँ जैसे नर्मदा, तापी, गोदावरी और कृष्णा मुख्यतः मानसूनी वर्षा पर निर्भर होती हैं।

लूनी नदी जैसी नदियाँ मरुस्थलीय क्षेत्र में बहती हैं और समुद्र तक नहीं पहुँच पातीं।

2️⃣ भारत की प्रमुख नदियाँ और उनके उद्गम स्थल

नदियों को याद रखने का सबसे आसान तरीका है — उद्गम + दिशा + समुद्र। नीचे दी गई तालिका परीक्षा और सामान्य ज्ञान दोनों के लिए बेहद उपयोगी है।

नदी उद्गम स्थल प्रवाह दिशा विशेष तथ्य
ब्रह्मपुत्र तिब्बती पठार पूर्व / उत्तर-पूर्व सबसे विशाल नदी प्रणाली
लूनी अरावली पर्वतमाला मरुस्थल में समाप्त समुद्र तक नहीं पहुँचती
साबरमती अरावली पर्वत पश्चिम अहमदाबाद से होकर बहती है
नर्मदा अमरकंटक पठार पश्चिम विंध्य-सतपुड़ा के बीच बहती है
तापी सतपुड़ा श्रेणी पश्चिम अरब सागर में गिरती है
गोदावरी नासिक, पश्चिमी घाट पूर्व सबसे लंबी प्रायद्वीपीय नदी
कृष्णा महाबलेश्वर पूर्व तूंगभद्रा इसकी प्रमुख सहायक
कावेरी ब्रह्मगिरि पहाड़ियाँ पूर्व जल विवाद के लिए प्रसिद्ध

3️⃣ पश्चिम की ओर बहने वाली नदियाँ बनाम पूर्व की ओर बहने वाली नदियाँ

भारत की भौगोलिक बनावट के कारण कुछ नदियाँ अरब सागर में और कुछ बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं।

पश्चिम की ओर बहने वाली नदियाँ — नर्मदा, तापी, माही, साबरमती और पेरियार — छोटी लेकिन तेज प्रवाह वाली होती हैं। इनमें डेल्टा कम बनता है।

पूर्व की ओर बहने वाली नदियाँ — गोदावरी, कृष्णा, कावेरी — लंबी होती हैं और बड़े डेल्टा बनाती हैं, जिससे कृषि को लाभ मिलता है।

4️⃣ शहरीकरण, नदी प्रदूषण और नदी प्रबंधन

आज भारत की सबसे बड़ी समस्या है — नदियों का प्रदूषण। यमुना नदी इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जो दिल्ली-NCR जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों से होकर बहती है।

कारखानों का अपशिष्ट, घरेलू सीवेज और धार्मिक गतिविधियाँ नदियों की स्वच्छता को प्रभावित करती हैं।

वहीं दूसरी ओर साबरमती रिवरफ्रंट जैसे प्रोजेक्ट यह दिखाते हैं कि सही योजना से नदियों को शहरी जीवन का हिस्सा बनाया जा सकता है।

5️⃣ अंतर्राज्यीय जल विवाद और राजनीति

भारत में नदियाँ केवल भौगोलिक विषय नहीं, बल्कि राजनीतिक मुद्दा भी हैं।

कावेरी जल विवाद — कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच — इसका सबसे चर्चित उदाहरण है। इसी तरह गोदावरी और कृष्णा जल विवाद भी सामने आते रहे हैं।

जल संसाधनों का न्यायसंगत बँटवारा आने वाले समय की सबसे बड़ी चुनौती है।

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“नदियों को समझना मतलब भारत की सभ्यता, अर्थव्यवस्था और भविष्य को समझना।”

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